मूर्खता : एक सात्विक गुण
5 वर्ष पहले
मेरा जन्म हुआ इश्क से...मेरा जन्म हुआ इश्क के लिए...इश्क का हर रूप हर रंग जीवन में यहाँ वहां छलका हुआ है...ढूंढ सको तो ढूंढ लो जो रंग चाहिए जीवन इन्द्रधनुषी करने के लिए
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5 टिप्पणियाँ:
लिखा पोस्ट जो आपने बातें कुछ हैं खास।
रचना भी अच्छी लगी शीर्षक करें तलाश।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
सही है..वादा लिया है तो झेलने दो . :)
वादा निभाउंगी ये दावा पसन्द आया
आधुनिक जीवन की विसंगति को आपने सीधे, सरल शब्दों में प्रभावशाली तरीके से अभिव्यक्ति दी है । कथ्य, शिल्प, भाव और विचार सभी प्रभावित करते हैं। सूक्ष्म संवेदना को आपने बडी बारीकी से रेखांकित किया है । बधाई ।
http://www.ashokvichar.blogspot.com
vaade ko vaada hee rahne do.
achchhi rachana
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