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शुक्रवार, अप्रैल 22, 2011

गुरु शिष्य सम्बन्ध


अभी रविवार को मैं दिल्ली गयी हुई थी अचानक एक फ़ोन आया
मैडम आप कहाँ हो?
मैंने कहा दिल्ली, क्यूँ क्या हुआ....
आप कब आओगे आपसे मिलना था....

जब वापस घर आयी फिर कॉल आया...मैडम आओ कालेज आ रहे हो..मैंने कहा हाँ अभी आ रही हूँ...ऐसा क्या हुआ की इतने फ़ोन कर रहे हो तुम लोग...कालेज पहुचती हूँ तो देखती हूँ मेरे स्टुडेंट्स को कुछ आवेदन पत्र वगेरह को सत्यापित करना था और जिनकी अंतिम तिथि आज की ही थी....मैंने सत्यापित करके कहा अरे किसी और से करा लेते ना आज इतनी भीड़ होगी फार्म जमा करने का अंतिम दिन है...पहले भी कितनी बार कहा है किसी और टीचर से मेरा नाम लेके करा लिया करो.....
मैडम हमें आपसे ही करना है...क्यूँकी आपके सत्यापित करने से हमें आपका आशीर्वाद भी मिल जाता है और ये गुड लक जैसे काम करता है इसलियें हम आपके ही पास आते हैं.

ये सुनकर मैं एकदम दंग रह गयी....समझ नहीं आया क्या प्रतिक्रिया दूं... आज भी विद्यार्थियों के लिए शिक्षको की शुभकामनाएं इतना मायने रखती है....मैं नहीं जानती उनके इस विश्वास, श्रद्धा के लिए क्या कहूँ....ये अहसास एकदम निशब्द है...जिसको मैं कभी नहीं भूल पाऊँगी...ये अहसास मेरा विश्वास गहरा करने में की मैंने सही राह चुनी है और मुझे मेरे विद्यार्थियों को और अच्छी शिक्षा देने के लिए हमेशा प्रेरणा देता रहेगा ! मैं ज्यादा नहीं अगर कुछ लोगों के जीवन को दिशा देने में ही सक्षम रहूँ तो ये मेरी शिक्षा, मेरी परवरिश की सबसे बड़ी सार्थकता साबित होगी!

मंगलवार, दिसंबर 01, 2009

शिक्षा के बदलते प्रतिमान

कॉलेज शिक्षा विभाग में आये मुझे अभी महिना भर ही हुआ है और मैं अपने आपको इस माहौल के अनुकूल नहीं बना पा रही हूँ. महाविद्यालयों में विद्यार्थी पंजीकरण काफी ऊँचा है पर कहीं कक्षा नहीं लगती और कहीं विद्यार्थी नहीं आते. अध्यापक गण भी विद्यार्थियों को पढ़ने की बजे अपने व्यक्तिगत कार्यों में व्यस्त हैं. इन दिनों महाविद्यालयों में रुकने की अवधि पहले की बनिस्पत २ घन्टे घटा कर ५ घंटे कर दी गयी है और साथ ही छठा वेतनमान भी लागू कर दिया गया है. इसके बावजूद शिक्षक महाविद्यालय में रहने से कतराते हैं और जो एक दो घंटा वहां रहते हैं उनमे भी कक्षाएं न के बराबर ले रहे हैं. मैं समझ नहीं पाती शिक्षक जो समाज का भविष्य निर्माता है वही अगर इस प्रकार की प्रक्रियाओं में लिप्त होंगे तो आने वाले समय में क्या होगा. दूसरी और विद्यार्थी है जिन्होंने छात्रवृति पाने के लिए महाविद्यालय में दाखिला तो करवा लिया है, पर कक्षों में आने की फुर्सत नहीं है. महाविद्यालय के विकास को दर्शाने के लिए कंप्यूटर सेंटर, नए नए कोर्से खोल लिए गए हैं, विद्यार्थियों के सर्वांगीन विकास हेतु विभिन्न कार्यकर्म चलाये जा रहे हैं . पर ये सब भी विद्यार्थियों को महाविद्यालय में लाने में सहायक सिद्ध नहीं हो रहे है.

अभी बहुत कुछ है लिखने के लिए पर सुबह उठ कर मुझे महाविद्यालय जाना है और कक्षा भी लेनी है. मैं उम्मीद करती हूँ की मेरे ब्लॉग को पढने वाले पाठक मुझे कुछ प्रोत्साहित करंगे अपने विचारों के साथ ताकि मैं इस विषय में लिखने की कोशिश को बरक़रार रखु.

नोट
मेरी कक्षा के कुछ विद्यार्थी नियमित रूप से आकर मुझे कृतार्थ कर रहे हैं, मैं उनकी आभारी हूँ की मुझे महाविद्यालय में खाली या इधर उधर चाय पीते हुए अपना समय व्यतीत नहीं करना पड़ता :)
 

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