हैं अरमान बहुत से इस दिल के
और हैं होंसले भी बुलंद बहुत इस दिल के
देखे कब ये दिल जिद्द पर आता है
और तुझको तुझ से चुरा ले जाता है !
चित्र साभार गूगल
मेरा जन्म हुआ इश्क से...मेरा जन्म हुआ इश्क के लिए...इश्क का हर रूप हर रंग जीवन में यहाँ वहां छलका हुआ है...ढूंढ सको तो ढूंढ लो जो रंग चाहिए जीवन इन्द्रधनुषी करने के लिए
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5 टिप्पणियाँ:
बहुत खूब!!
वाह!! क्या कहने...सुन्दर!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/
बहुत सुन्दर
जिसपर दिल आया उसको चुराना क्यों, उसे तो दिल में बिठा लेंगे.
मेरे पास शब्द नहीं हैं!!!!
बस इतना कहूँगा कि मुझे भाव बहुत सुन्दर लगे
ये चोरी कभी न होगी
न सीनाजोरी होगी
ये ऐसा रोग है
जो लगाये नहीं लगता
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