शुक्रवार, मई 04, 2012

यादों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती



क्या यादों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती? क्यूँ कुछ लोग साल दर साल याद आते रहते हैं....चाहो ना चाहो याद जाने कहाँ से इतने पहरेदारों, कैमरों के बाद भी अन्दर घुस ही जाती है और फिर कहीं छुप के ऐसे कहीं बैठ जाती है की कितने ही जासूस, पुलिस पीछे लगा दो मिलती ही नहीं...ईश्वर से कितनी ही प्राथना करो...मंदिरों मस्जिदों पर मन्नत का धागा बांधो...की मोलवी से ताबीज़ बंधवा लूं ...कुछ नही होता ...किसी ने कहा इक्कीस दिन मंदिर जाओ और हमने भी बिना नागा रोज ईश्वर के दरबार में हाजिरी दी पर एकीसवें दिन तक लगा ईश्वर ने तो हमें उनको ना भूलने का वर दे डाला...कहीं ईश्वर तुमने मेरी प्राथना गलत तो नहीं सुन ली ...या मेरे ही शब्द जबान से निकलते समय मुझसे दगा कर गए....किसी ने कहाँ पहाड़ी वाले पीर बाबा से ताबीज़ बंधवा लो वो तुम्हारी याद के प्रेत को की आत्मा जो भी हो उससे मुझे दूर रखेगा...पहाड़ी पर चढ़ते चढ़ते पैर छिलने लगे पर तुम्हारी याद का दर्द इन छालों से कहीं ज्यादा था.... पीर बाबा तुमने ताबीज़ बांधते वक़्त ये कौनसा मंत्र फूंका की उसकी याद जूनून बन गयी...और अब पहले से ज्यादा हर पल साथ है...साया भी दिन ढलने पर साथ छोड़ देता है पर याद तो दिन के चोबीस घंटे , हर घडी साथ ही रहती है...एक दोस्त ने कहा किसी और से मिल कर देखो कौन जाने मन से उसकी यादें धुंधला जाएँ....सही ही कहा था धुंधला तो गयी थी मेरी आँखे ...लगता था अब याद मेरा पीछा छोड़ देगी पर जब सूरज निकला और धुंध हटी तुम्हारी यादें पहले से भी ज्यादा शिद्दत से साथ हो ली...एक दिन मैंने तुम्हारी पसंद के सब दुपट्टे निकाले... और ऐसे रंगों में रंगवाये जिनसे तुम्हारी कोई याद पसंद ना छलके ...पर रंगरेज मेरे तूने ये किस जनम का बदला लिया, तूने ये कौनसा रंग डाला की हर रंग तुम्हारा ही लगता है...मेरे पहले से ज्यादा करीब हो जाता है..जब भी चुनर ओढ़ी और खुद को देखा तुम्हारी नज़रें अपने ऊपर ही पायी....बार बार धोया हर रंग मैंने पानी में...पर पानी ने भी हर रंग को और शोख बनाया....जितना धोया उतना ये मुझपे और चढ़ता गया... सारी नदिया तुम्हारे ही रंग में रंग गयी....कहीं तुमने तो रंगरेज को रिश्वत नहीं दी इश्क का रंग चढ़ने को... की तुमने नदिया को अपने हाथों से छु प्रेममय होने का वरदान दे डाला ?

बुधवार, अप्रैल 25, 2012

यूँ भी कोई रूठता है ?


तुम्हारा ऐसे चले जाना
बिलकुल नहीं अच्छा लगा मुझे
एक मेसेज कर दिया की
बस अब मुझसे बात ना करना
हमारा रिश्ता खतम
तुम्ही कहो जान
ऐसे भला कोई रूठकर जाता है
जीवन भर के लियें ?

नहीं देती मैं दुहाई
तुम्हारे वायदों की
ना ही देती मैं दुहाई तुम बिन
जीकर भी ना जी पाने की
गर रूठो तो मुझे
मनाने का मौका भी दो,
मैं गलती करूँ कोई तो
सजा देने का अधिकार भी तुम रखो

नहीं कोई गलती ऐसी जहाँ में
जो तोड़ दे इश्क की डोर
नहीं कोई सजा बनी इस जहाँ में
की मेरा ईश्वर ही मुझे छोड़ चल दे !


गुरुवार, अप्रैल 19, 2012

:)



मुझमे अजब सी बैचैन छाई है
शायद ये हवा तुझे छूकर आयी है :)

सोमवार, अप्रैल 16, 2012

मन बावरा तुझे ढूंढ़ता...



सुबह सुबह मंदिर की घंटी बजती है और सबसे पहले आँखों के सामने तुम्हारा चेहरा होता है...रात को सोते हुए ईश्वर को याद करती हूँ पर जब आँखे बंद करती हूँ आँखों में तुम्हारी ही छवि समायी होती है...कहीं किसी दिन ईश्वर भी नाराज़ हो गए मेरे ये हरकतें देखकर तब....जिस भी शख्स से मिलती हूँ तुम्हारी झलक दिख ही जाती है...कभी कभी तो यूँ ही तुम्हारा नाम निकल जाता है किसी और को बुलाते वक़्त भी....इस शहर में जाने कितनी जगह है जो तुमसे जुडी हैं...वो जगह जहाँ कभी हम दोनों साथ गुजरे थे...वो जगह जहाँ कभी तुम रहते थे या जाते थे....कुछ जगह तो ऐसी हैं जो तुमसे जुड़े लोगों से जुडी हैं...पर वहां जाकर भी मुझे तुम्हारे होने का अहसास होता है....ऐसा क्या है की तुमसे जुड़ा हर शख्स, हर स्थान मेरे उतने ही करीब है जितने तुम...तुम्हे लगता है मैं तो तुमसे भी ठीक से नहीं जुडी फिर क्यूँ जहाँ तुम्हारे तार किसी भी वजह से जुड़े हैं वो मेरे मन को झंकृत कर ही जाते हैं...मैं बेवजह इन जगहों पर जाती हूँ, घूमती रहती हूँ...लगता है कहीं से एक दिन अचानक तुम सामने आ जाओगे और मेरा नाम अपनी आवाज में पुकारोगे...कई बार सड़क पर अकेले चलते चलते तुम्हे याद कर मेरे चेहरे पर मुस्कुराहर आ जाती है तो पास से गुजरते लोग मुझे पागल समझ हँस देते हैं...तुम्हारा दिया लाल गुलाब मैंने preserve करके रख लिया है...जब भी घर में घूम रही होती हूँ लगता है तुम्हारी आँखे मुझे देख रही है....शाम तलक हर जगह यूँ तुम्हे पाकर भी ना पाकर सारा मन यूँ भर आता है की लगता है रो पड़ी तो सारी दुनिया उस पानी में बह जाएगी...तुम्हारी आँखों के समुन्दर में जब पहली बार मैंने खुद को देखा था डूबते हुए बिलकुल वैसे ही... कभी मैं पहाड़ी पर जाकर जोर से तुम्हारा नाम पुकारती हूँ और जानते हो वापसी में मेरा नाम वापस आता है...ये कौनसा जादू है जो तुम्हारे नाम की ध्वनि मेरे नाम में प्रतिध्वनित होती है... तुम्हे पता भी आजकल रोज सवेरे तुम्हारा ही सपना आता है...कुछ अजीब सा सपना है...मेरे सपने में तुम ही मुझे बुलाते हो पर मैं हूँ जाने कौनसे दिवा स्वपन में खोयी होती हूँ ....की बहुत समय बाद तुम्हारे फ़ोन या संदेस पढ़ती हूँ...और जब मैं तुम्हे पलटकर बात करूँ तो तुम पहुच से बाहर होते हो...दिन का कोई ऐसा पल नहीं जब मैं तुमसे बात नहीं करना चाहती...पर तुमने कहा अब बात मत करना बस यही है जो मुझे रोकता रहता है...तुम्हारा कहा टालने की मैं हिम्मत नहीं जुटा पाती और शायद इस हिम्मत से ज्यादा मैं अपने तुमसे बात करने की कोशिश के बाद के तुम्हारे जवाब से डर जाती हूँ...कई बार मन करता है फ़ोन,लैपटॉप सबको उठा के पानी में डाल दूं...और ऐसी जगह चली जाऊं जो इस तकनीकी भरी दुनिया से दूर हैं...जहाँ मेरा तुम तक पहुचने का हर रास्ता बंद हो...पर मन के रास्ते कभी बंद हुए हैं...इश्क तो किसी भी रास्ते से अन्दर आ ही जाता है...और यहाँ तो मेरा मन, तन सब इश्क से भरा पड़ा है...


मंगलवार, अप्रैल 10, 2012

शब्द


शब्दों में ढालनें से,
अपने ज़ज्बातों को डरती थी मैं,
अपने कहीं तज ना दे,
जब मिली तुमसे,
की पहली बार कोशिश,
शब्दों को गुनने की,
पर जब तुम मुझे तज चल दिए,
मेरा शब्दों से साथ सदा के लिए छूट गया !

मंगलवार, मार्च 20, 2012


चल दुनिया घूम के आते हैं...देखे तो दुनिया में क्या क्या है...सबसे पहला ट्रिप तो यूरोप का ही करेंगे.....यार तुझे पता है फ्रेंच लड़के कितने हॉट होते हैं और पोलाईट भी...और "फ्रेच किस" के बारे में इतना सुना है पर लगता है जब एक्सपेरिएंस करुँगी फ्रेंच के साथ ही वरना क्या मजा.....इटली भी चलेंगे...प्यार का शहर वेनिस देखने...सुनती हूँ वहां प्यार ही प्यार भरा है...अपन भी तो देखे "खालिस इश्क" है की प्रदर्शनी वाला...वैसे तो इटेलियंस के चेहरे ऐसे खीचे होते हैं....वो तू क्या कहती है "सारी दुनिया का बोझ इनपे ही पड़ा है उस टाइप "के....अब तू ही बोल जिनके चेहरे ऐसे खीचें हो उनके देश में इश्क विश्क की क्या मजाल की घुस भी जाए...है ना... जब देखो तू पढने पढ़ने में लगी रहती है...मैंने ये सब सुनकर हलके से मुस्कुरा दिया...तो उसने मुझे घूर के देखा और बोली...अच्छा स्वित्ज़रलैंड चल ...यश चोपरा की फिल्मे देख देख अब तो मैं सोचती हूँ एक बार स्वित्ज़रलैंड हो ही आऊं ताकि एक बार में ही सब देख लूं...हर बार अडवांस बुकिंग की लाइन में लग लग के थक गयी हूँ....कौन जाने अबकी बार मुझे और तुझे भी वो असली वाला राज मिल जाए....ये चिरकुट लडको से और उनके नखरों से तंग आ गयी हूँ यार मैं तो...मैंने तो ३ मनीष मल्होत्रा की शीफोंन साड़ी भी ले ली हैं वहां पहनने को...और सुन वहां जाके मुझे लेदर कोट पहनने का भाषण मत करियो तू... तेरे इंग्लैंड भी चलेंगे ही वैसे मुझे स्कोत्तिश छोकरे ज्यादा पसंद हैं...ब्रिट्स जैसे ना तो उनके दिमाग सातवें आसमान पे हैं... "सूडो मोरेलिस्ट्स" हैं ...ब्रिट के साथ सारी ज़िन्दगी रहो तो भी अपने से नीचे दर्जे का ही ट्रीट करेंगे यार...मुझे तो बस विंडसर केसल जाना है यार....परी कथा वाला महल है सुना है मैंने....रानी ने अपनी मर्जी से बनवाया था....किताबों में जब उसके फोटो देखती थी ना तो मन करता था बस कैसे कुछ करके पहुच जाऊं ....चल अपुन वैसा महल नहीं बनवा सकते तो क्या देख के तो आ ही सकते हैं ना......अरे स्पेन तो रह ही गया...जबसे ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा देखी है मेरा मन करता है मैं भी स्पेन जाउँ मछली बन जाऊं और समंदर में तैरू...कभी पंछी बन आकाश में डोलूं ...बेल्जियम तो बाबा मैं भूल ही गयी...यार चोकलेट के देश तो जाना बनता ही है...मैं भी तो देखूं कैसी होती है चोकलेट की नदिया...यार सुनती हूँ लोग उनमे कूद कूद के चोकलेट खाते हैं याद है तुझे वो बचपन की पढ़ी कहानी....मेरे होठों पे तो अब तक उसका स्वाद है...अरे सुन भी रही है की मुस्कुराती ही रहेगी...यहाँ ही पड़ी रहेगी ना तो दुनिया के बारे में कुछ नहीं पता चलेगा...कब आयी कब विदा हो गयी एक झटके में समझी...मरने से पहले कुछ तो कर ले बोगुस राम....जब देखो पढना पढ़ना और क्या उस बददिमाग डॉक्टर की यादों में अटके रहना...उसको मेसेज करना कुछ और नहीं है तेरे पास काम...वो हीरो तेरे संदेसो का जवाब तक देने की जहमत नहीं उठता और जब मन हो एक लाइन लिख भेज देता है चार चार दिन में ...मार गोली उसको चल कोई नया लड़का ढूंढे तेरे लिए...डॉक्टर चाहिए तो वो भी....पर इस सख्त दिल को छोड़ यार अब तू....मैं हंसती हूँ ....और कहती हूँ इश्क में पड़ फिर देख ये कमरा स्वित्ज़रलैंड से सुन्दर लगेगा....उसका माथे पे किया एक किस फ्रेंच किस से भी मीठा लगेगा...प्रेम का शहर देखने को वेनिस जाने की कहाँ जरुरत ...इश्क में पड़ने पर अगर आप साथ हो तो हर जगह हर शहर वेनिस ही है...प्यार से बना छोटा सा घर छोड़ अपने प्रिय का हाथ पकड़ खुले आसमान के नीचे भी खड़ी होगी तो किसी परीलोक से कम नहीं ज्यादा ही लगेगा.....इश्क कर एक एक्लैर्स की टोफ्फी उसके साथ मिलके खा बेल्जियम चोकलेट का स्वाद तक भूल जायेगी तू...एक्लायेर्स छोड़ एक बार उसके होठो पे अपने होठो को रख फिर बताना उससे मीठा कुछ है क्या....बारिश में हाथ पकड़ खड़ी हो मछली बन हिंद महासागर पार होने का अहसास हो जायेगा....और रही तेरी पंछी बनने की ख्वाहिश...पैरों में इश्क के पंख लगने दे...ये यूरोप क्या पृथ्वीलोक...स्वर्गलोक...नरकलोक तीनो का चक्कर एक साथ ही लग जायेगा...यार ये डॉक्टर तुझे कितना सख्त दिल लगे पर मैंने तो उसके साथ में सारी दुनिया देख ली....उससे इश्क होने के बाद मैंने जाना की लोग मोक्ष मिलने के लिए जो सब तप करते हैं ....बस एक बार इश्क करले मोक्ष एक पल में नसीब हो जाएगा !!!

♥ सुरभि ♥

सोमवार, मार्च 19, 2012

जन्म जन्मान्तर का बंधन


सुन लो तुम इस जन्म में तो चल गया पर अगले जन्म में नहीं चलेगा...मैं जैसी हूँ तुम्हे वैसी ही पसंद आनी ही चाहिए...कोई किन्तु परन्तु नहीं...अगर मैं जिद्दी होऊं तो गले से लागा लेना या दो थप्पड़ मार लेना...पर मुझे छोड़ना तो बिलकुल ही नहीं ...और हाँ मुझे तुम्हारे अलवा किसी और से प्यार होगा ऐसा तो सोचना ही नहीं...क्यूंकि भगवान ने मेरे दिल को सिर्फ एक नाम सुन धड़कने का वर दिया है और वो तुम्हारा है...अगर कभी मुझे और तुम्हे ऐसी ग़लतफ़हमी हो भी जाए की की हमारा दिल कहीं और है तो बस एक बार मेरी आँखों में आँखे डाल झांक लेना वहां सिर्फ तुम्हारा अक्स है...क्या तुम्हे पता भी है मेरे तुम्हारे सब जन्मो की बुकिंग ईश्वर ने पहले ही जन्म में कर दी थी एक दूसरे के साथ...क्यूंकि हमें बनाते ही ईश्वर को पता लग गया था की उसने गलती से एक जान दो शरीरों में डाल दी हैं..और जब भगवान को ये पता चला तब तक वो तुम्हे दुनिया में भेज चुके थे...तो बस उन्होंने फैसला लिया की तुम और मैं...मैं और तुम आने वाले हर जन्म में एक दूसरे के ही रहेंगे...पर भगवान बेचारे भी एक बात में चक्कर खा गए..उन्हें नहीं पता था दुनिया में आकर तुम इतने व्यावहारिक बन जाओगे और इश्क में भी नफे नुक्सान,अच्छे बुरे का सौदा करोगे...जानते हो अब तो ईश्वर भी पछता रहे हैं की तुम्हे इतना दिमाग दे उन्होंने गड़बड़ कर डाली...की ब्रह्मा के लिखे को तुमने बदलने की हिम्मत की...और वो ये भी सोच रहे हैं की उन्होंने मुझे इतना भोंदू क्यूँ बनाया...और कन्याओ जैसा समझदार नहीं बनाया की मैं जान संकू सिर्फ निस्वार्थ प्रेम से नहीं तुम्हे बाँधने को मुझे इस दुनिया के कुछ वशीकरण युक्तियों से भी नवाजाना था...ईश्वर को लगा की इस जन्म में भी मुझे पिछले जन्मो जैसी तुम्हारे इश्क में डूबी लड़की रखे...पर वो भूल गए आज के युग में इश्क के साथ साथ बांधे रखने को कुछ और कलाएं भी आनी चाहिए...वरना जन्मो का साथ भी कब छूट जाए कौन जाने...मैंने तो कह दिया है ईश्वर से अगली बार भी मुझे ऐसा ही रखना तुम्हारे प्यार से परिपूर्ण... मुझे नहीं चाहिए कोई और कला...की वशीकरण युक्ति....देखूंगी मैं की अगले जन्म में तुम्हारा दिल इधर उधर डोलता है की मेरे दिल की धडकन को सुनता है....मैं अगले जन्म के लिए अपने सब अहसास संजो कर रख रही हूँ....ताकि उस जन्म में मैं उन्हें शब्द दे सकूँ और तुम्हे बता सकूँ अपने हर अहसास के बारे में और दूर कर सकूँ तुम्हारी सब शिकायतें...अगले जन्म में तुम मुझे थोड़ी फुरसत से मिलना ताकि मैं जी सकूँ उन सब पलों को जो मैंने अब तक के जन्मो में तुम्हारे साथ बिताये है और संजोये हैं....लोग इस जन्म में साथ जीने की कसमें खाते हैं पर जानां मुझे इस जन्म के पार भी उस जन्म में तुम्हारा इंतज़ार हैं पूर्ण होने के लिए :)
 

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