मूर्खता : एक सात्विक गुण
5 वर्ष पहले
मेरा जन्म हुआ इश्क से...मेरा जन्म हुआ इश्क के लिए...इश्क का हर रूप हर रंग जीवन में यहाँ वहां छलका हुआ है...ढूंढ सको तो ढूंढ लो जो रंग चाहिए जीवन इन्द्रधनुषी करने के लिए
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3 टिप्पणियाँ:
स्त्री और पुरुष दोनो ही ईश्वर की सुन्दरतम रचना है जिनकी एक दूसरे से कोई प्रतियोगिता नही, बराबरी नही.
-बहुत उच्च विचार..साधुवाद!!
नारी और पुरुष अपने अपने क्षेत्र में निरंतर प्रगति करे..बस यही भावना हो..बाकी कोई किसी का शोषण करे ..यह गलत है....
दोनो को साथ साथ हाथ मिलाते हुए चलना चाहिए ना की बराबरी करते हुए, प्रतिस्पर्धा करते हुए.
Bilkul sahmat hun aapse.
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