तुम एक आम का पेड़ जिसकी शीतलता ने हर पल मुझे सहलाया है,
जिसके फलों की मिठास से मेरा सारा जीवन मिठास से भर गया !
नमक-मिर्च की सोहबत
2 दिन पहले
मेरा जन्म हुआ इश्क से...मेरा जन्म हुआ इश्क के लिए...इश्क का हर रूप हर रंग जीवन में यहाँ वहां छलका हुआ है...ढूंढ सको तो ढूंढ लो जो रंग चाहिए जीवन इन्द्रधनुषी करने के लिए
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3 टिप्पणियाँ:
बहुत खुब,
बस जी इतना ही ....मगर गजब है जी इतना भी ....
कविता ए टी आर विमान जैसी लगी, शुरू होते ही समाप्त हो गयी।
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