मूर्खता : एक सात्विक गुण
5 वर्ष पहले
मेरा जन्म हुआ इश्क से...मेरा जन्म हुआ इश्क के लिए...इश्क का हर रूप हर रंग जीवन में यहाँ वहां छलका हुआ है...ढूंढ सको तो ढूंढ लो जो रंग चाहिए जीवन इन्द्रधनुषी करने के लिए
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8 टिप्पणियाँ:
Nice Article...Thank You.
बिल्कुल सही फरमाया। काश, यह बात हम लोग समझ पायें और इसे अपने जीवन में उतार लें।
वो मनुष्य ही क्या, जो चूल्हे में से उबाल आकर गिर चुके दूध के लिए हाय तोबा न मचाये ? :)
यही जीवन को जीने का सबसे सही तरीका है।
( Treasurer-S. T. )
बिलकुल सही कहा जी आपने ये जीवन जीनी की कला है ये देखिये
उबरते रहे हादसों से सदा
गिरे, फिर उठे, मुस्कुरा कर चले---gautam raaj rishi
धन्यवाद्
बिल्कुल सही ......
बेहद खूबसूरत । प्राप्ति का स्वीकार है यह ! आभार
मुझे आपकी पहली पोस्ट में, कुछ् जवाब देखने को मिला है, वरना तो आपके पास प्रश्न ही प्रश्न हैं. थोड़ी निराशामय है, पर अच्छा है नज़रिए के अनुसार.
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